Good News : बिहार में बस डिपो अब सिर्फ यात्रियों के आने-जाने की जगह नहीं रहेंगे; बल्कि वहां बेहतर खाने की सुविधा भी मिलेगी। पहले चरण में, राज्य भर के प्रमुख बस डिपो पर ‘जीविका दीदी के किचन’ शुरू किए जाएंगे। इस पहल का मकसद यात्रियों, बस ड्राइवरों और डिपो स्टाफ को किफायती दामों पर साफ और पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना है। परिवहन और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के निर्देश पर इस योजना को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।
निरीक्षण के दौरान खराब हालत का खुलासा, मंत्री ने जताई नाराजगी:
हाल ही में, परिवहन मंत्री ने कई बस डिपो का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, डिपो परिसर में खाने-पीने की सुविधाओं की अव्यवस्थित और गंदगी वाली हालत सामने आई। मंत्री ने यात्रियों और ड्राइवरों के लिए सही खाने की कमी पर गहरी नाराजगी जताई और अधिकारियों को बस डिपो पर बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने के साफ निर्देश दिए। इसके बाद, ‘जीविका दीदी के किचन’ को बस डिपो के साथ जोड़ने का फैसला किया गया।
मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यात्रियों और ड्राइवरों को अक्सर बस डिपो पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में, किफायती और भरोसेमंद खाने की सुविधा मिलने से यात्रा का अनुभव बेहतर होगा। दीदी के किचन के ज़रिए, खाने की क्वालिटी, साफ-सफाई और कीमत पर कंट्रोल रखा जाएगा। इससे न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि डिपो की छवि भी सुधरेगी।
परिवहन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग की पहल :
यह योजना परिवहन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के तालमेल से लागू की जा रही है। ग्रामीण विकास विभाग के तहत पहले से चल रही जीविका योजना अस्पतालों, सरकारी दफ्तरों और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर सफल साबित हुई है। अब, उसी मॉडल को बस डिपो पर अपनाया जा रहा है ताकि इसका फायदा ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच सके।
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अनुसार, पहले फेज में ‘जीविका दीदी के किचन’ बांकीपुर, आरा, बिहारशरीफ, फुलवारीशरीफ, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मोतिहारी, छपरा, सीवान, दरभंगा, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, नवादा, भागलपुर, जमुई, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा के बस डिपो में शुरू किए जाएंगे। भविष्य में इसे दूसरे डिपो तक फैलाने की भी योजना है।
महिलाओं को सशक्त बनाना और स्वरोजगार को बढ़ावा देना
इस पहल का एक मुख्य पहलू महिला सशक्तिकरण है। जीविका से जुड़ी महिलाएं इन किचन को चलाएंगी, जिससे उन्हें स्थिर रोज़गार और आर्थिक आज़ादी मिलेगी। यात्रियों को फायदा पहुंचाने के अलावा, यह योजना ड्राइवर कल्याण को भी मज़बूत करेगी और महिलाओं के स्वरोजगार के लिए एक ठोस आधार प्रदान करेगी।

