Bihar Politics : राष्ट्रीय जनता दल में बड़ा संगठनात्मक बदलाव होने की चर्चा तेज है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक लालू प्रसाद यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। नेतृत्व की जिम्मेदारी वे पहले ही अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को सौंप चुके हैं। अब इसे औपचारिक रूप देने की तैयारी है ताकि तेजस्वी को पूरी संवैधानिक शक्ति मिल सके।
तेजस्वी के RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने से पार्टी और बिहार की राजनीति में क्या बदलेगा। इसे 3 अहम बिंदुओं में समझा जा सकता है।
1. नेतृत्व का औपचारिक ट्रांसफर
अब तेजस्वी के हाथ में पूरी कमान
1997 में RJD की स्थापना से अब तक लालू प्रसाद यादव ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। उनका राजनीतिक कद अब भी बड़ा है लेकिन उम्र और स्वास्थ्य के चलते वे सक्रिय राजनीति में पहले जैसे नहीं रह पाए हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर यह भावना मजबूत हुई है कि तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए।
- इसके बाद पार्टी में नेतृत्व का आधिकारिक ट्रांसफर हो जाएगा।
- तेजस्वी की ताकत को अंदर से कोई चुनौती नहीं दे पाएगा।
- तेजप्रताप यादव पहले ही पार्टी और परिवार से 6 साल के लिए बाहर हैं।
- नीति निर्धारण संगठनात्मक बदलाव चुनावी रणनीति और टिकट वितरण जैसे फैसले तेजस्वी खुद लेंगे।
- प्रदेश अध्यक्ष सहित अहम पदों पर बदलाव कर सकेंगे।
- पार्टी में अनुशासन लागू करने और भीतरघात करने वालों पर कार्रवाई का अधिकार मिलेगा।
- गठबंधन को लेकर फैसले लेने में लालू की औपचारिक मंजूरी का इंतजार नहीं रहेगा।
दरअसल जनवरी 2025 में पटना में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी संविधान में संशोधन कर तेजस्वी को पहले ही सशक्त किया जा चुका है। उस फैसले के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए भी तेजस्वी को बराबर के अधिकार दिए गए हैं। टिकट वितरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार उन्हें मिल चुका है।
2. तेजस्वी को नहीं चाहिए पुरानी पारिवारिक RJD
RJD में पारिवारिक खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। तेजप्रताप यादव अपनी अलग जनशक्ति जनता दल को लालू की असली विरासत बता रहे हैं। दही चूड़ा भोज में राबड़ी देवी के भाइयों के साथ लालू यादव की मौजूदगी से यह संदेश गया कि परिवार को फिर जोड़ने की कोशिश हो सकती है।
- लेकिन यह तेजस्वी को रास नहीं आएगा।
- मीसा भारती तेजप्रताप के साथ खड़ी नहीं दिखीं।
- वे न तो दही चूड़ा भोज में शामिल हुईं और न ही समर्थन जताया।
- सांसदों की बैठक में मीसा तेजस्वी के सबसे करीब बैठी नजर आईं।
इन हालात में कार्यकारी अध्यक्ष बनकर तेजस्वी पार्टी को पुराने विवादित चेहरों से दूर रख सकते हैं। वे यह तय कर पाएंगे कि RJD की छवि भविष्य में कैसी होगी और किन लोगों को आगे बढ़ाया जाएगा।
3. राष्ट्रीय राजनीति में तेजस्वी का कद बढ़ेगा
कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव का राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ेगा। इंडिया गठबंधन की बैठकों में उनकी भूमिका और मजबूत होगी। कांग्रेस सहित अन्य दल उन्हें सीधे निर्णय लेने वाले नेता के रूप में देखेंगे।
- अब वे कागजों पर भी RJD के सर्वेसर्वा होंगे।
- बिहार के बाहर चुनाव लड़ने या न लड़ने का फैसला
- किस राज्य में किस दल से गठबंधन करना है
- इन सभी मुद्दों पर तेजस्वी खुलकर निर्णय ले सकेंगे।
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक ;
राजनीतिक विश्लेषक प्रवीण बागी के मुताबिक तेजस्वी अभी असंवैधानिक रूप से पार्टी के सबसे ताकतवर नेता हैं। कार्यकारी अध्यक्ष बनते ही इस स्थिति को संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा। आगे चलकर लालू अध्यक्ष पद छोड़कर संरक्षक की भूमिका में आ सकते हैं।
वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी का कहना है कि कार्यकारी अध्यक्ष के पास लगभग वही शक्ति होती है जो नियमित अध्यक्ष के पास होती है। उन्होंने पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है और तेजस्वी के लिए विपक्ष की राजनीति आसान नहीं होगी। पार्टी और परिवार दोनों स्तर पर दबाव बना रहेगा।
कुल मिलाकर RJD में यह बदलाव सिर्फ पद का नहीं बल्कि सत्ता और नियंत्रण का पूरा हस्तांतरण होगा। इससे साफ है कि आने वाले समय में पार्टी पूरी तरह तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चलती नजर आएगी।


