Actor Pawan Singh : भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह ने शनिवार को यह साफ कर दिया कि वे बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने खुद को भारतीय जनता पार्टी का “सच्चा सिपाही” बताते हुए कहा कि उनका राजनीति में आने का उद्देश्य सिर्फ सेवा करना है, न कि चुनाव लड़ना।
पवन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की और लिखा, “मैं पवन सिंह अपने भोजपुरी समाज को यह बताना चाहता हूं कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी में शामिल नहीं हुआ हूं। मेरा कोई राजनीतिक पद पाने या चुनावी राजनीति में उतरने का इरादा नहीं है। मैं भारतीय जनता पार्टी का एक सच्चा सिपाही हूं और हमेशा रहूंगा।”
हाल के दिनों में पवन सिंह की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से हुई मुलाकातों के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि वे इस बार चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि, अब उनके इस बयान ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।
पत्नी ज्योति सिंह से विवाद बना चर्चा का विषय :
पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रहा विवाद भी लगातार सुर्खियों में है। 8 अक्टूबर को दोनों ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। मुंबई में मीडिया से बातचीत में ज्योति सिंह ने कहा कि उन्हें भावनात्मक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। वहीं, पवन सिंह ने उनके आरोपों को एकतरफा बताते हुए कहा कि सच्चाई सिर्फ वही, ज्योति और भगवान जानते हैं।
पवन सिंह ने बताया, “ज्योति सिंह ने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि वह मुझसे मिलने लखनऊ आ रही हैं। मुझे उनके इरादों का अंदेशा था और मैंने पहले ही प्रशासन को सूचना दे दी थी। मुलाकात के दौरान मेरे भाई ऋतिक और धनंजय भी मौजूद थे, जबकि ज्योति के साथ उसका भाई और बड़ी बहन जूही थीं।”
क्या ज्योति सिंह उतरेंगी चुनावी मैदान में?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि पवन सिंह के चुनाव न लड़ने के बाद क्या उनकी पत्नी ज्योति सिंह राजनीति में कदम रखेंगी। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बिहार की सियासत में क्यों अहम हैं पवन सिंह ?
पवन सिंह बिहार के शाहाबाद क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, जो राज्य की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इसमें भोजपुर, आरा, रोहतास, सासाराम, कैमूर भभुआ और बक्सर जैसे जिले शामिल हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में इस इलाके में बीजेपी का प्रदर्शन कमजोर रहा था, जहां 22 में से केवल 8 सीटें एनडीए के खाते में आई थीं। बाकी 14 सीटें महागठबंधन ने जीत ली थीं।
2024 के लोकसभा चुनाव में पवन सिंह के निलंबन और राजपूत-कुशवाहा समुदायों के बीच टकराव के चलते एनडीए को इस क्षेत्र की पांच में से चार सीटें गंवानी पड़ीं। ऐसे में पार्टी के लिए यह इलाका एक बार फिर बड़ी चुनौती बना हुआ है।

