Bihar Election 2025 :बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, बिहार की नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत, राज्य के प्रत्येक परिवार की एक महिला को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वह अपना कोई काम करके आत्मनिर्भर बन सकें। सरकार का दावा है कि यह कदम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोज़गार शुरू करने में मददगार साबित होगा। इसके लिए आवेदन भी शुरू हो गए हैं।

बहरहाल, अब पूरे राज्य में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या नीतीश कुमार की यह योजना चुनावों में मोदी सरकार के मुफ़्त राशन की तरह ‘हथियार’ साबित होगी? क्या बिहार चुनाव में 27,000 करोड़ परिवारों को लुभाने का दांव उन्हें जीत दिला पाएगा? क्या यह योजना पीएम मोदी की मुफ़्त राशन योजना की तरह बिहार में भी सफल होगी? आपको बता दें, कोरोना काल में शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)’ को अब 2029 तक बढ़ा दिया गया है। इसके तहत 81 करोड़ से ज़्यादा लोगों को हर महीने मुफ़्त राशन मिल रहा है। इस योजना से भाजपा को कई राज्यों में चुनावी फ़ायदा हुआ।

बिहार में 2.70 करोड़ परिवार होंगे लाभार्थी:

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में इस योजना के बारे में कहा था कि ‘राज्य में लगभग 2.70 करोड़ परिवार हैं। इनमें से प्रत्येक परिवार की एक महिला को आवेदन करने पर तुरंत 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल सकेगी। ज़रूरत पड़ने पर सरकार दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी देगी।’

27 हज़ार करोड़ रुपये का बड़ा खर्च:

सरकार के सूत्रों के अनुसार नीतिश सरकार की इस योजना के तहत महिलाओं को 10,000 रुपये देने पर करीब 27 हज़ार करोड़ रुपये खर्च होने के अनुमान है। वहीं इससे बिहार की राजनीति में इस योजना का बड़ा असर पड़ सकता है।

नीतीश ने तेजस्वी यादव के हर वादे का निकाला तोड़ :

दरअसल, राजद नेता तेजस्वी यादव ने हाल ही में पेंशन बढ़ाने और मुफ़्त भर्ती परीक्षा जैसी योजनाओं का वादा किया था। इससे पहले तेजस्वी ने महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने वाली ‘मेरी बहन मान’ योजना का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि इसी के जवाब में नीतीश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ का कार्ड खेला।

क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?

बिहार की राजनीति के जानकार रमाकांत चंदन मानते हैं कि नीतीश कुमार की राजनीति शुरू से ही महिला सशक्तिकरण की रही है। नीतीश कुमार को चुनावों में इसका फ़ायदा भी हुआ है। ऐसे में नीतीश कुमार कभी नहीं चाहेंगे कि महिला मतदाता विपक्षी दलों की किसी योजना के बहकावे में आएँ। ऐसे में नीतीश कुमार की यह योजना विपक्ष द्वारा किए गए नकद वादों का मुकाबला करने का एक प्रयास है।

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