Bihar Vidhan Sabha Live : बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन, दूसरे सत्र के दौरान सदन में जमकर हंगामा हुआ। तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी के बीच तीखी बहस हुई। हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
पेपर लीक के मुद्दे पर तेजस्वी और डिप्टी सीएम आमने-सामने आ गए। तेजस्वी ने कहा, “पेपर लीक में बिहार नंबर वन है, जिस पर सम्राट चौधरी ने आपत्ति जताई। जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई।”
इससे पहले सदन में बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, ‘एनडीए सरकार बिहार में 20 साल से सत्ता में है। वे केंद्र में 11 साल से सत्ता में हैं।’
तेजस्वी ने कहा, ‘हमने अमित शाह का बयान देखा – चुनाव तक नीतीश जी नेतृत्व करेंगे। चुनाव के बाद हम मुख्यमंत्री तय करेंगे। क्या वजह है कि भाजपा नीतीश पर भरोसा नहीं करती।’
‘शाह आ रहे हैं, उन्हें कहना चाहिए कि 2025 में बिहार में नीतीश कुमार ही सीएम होंगे। लेकिन, कबाड़ सरकार नहीं चलेगी।’
तेजस्वी यादव बोल ही रहे थे कि उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा खड़े हो गए। उन्होंने कहा, ‘जिन्हें आप कबाड़ कह रहे हैं, उनके पिता ने बिहार को लूटकर कबाड़ बना दिया। नीतीश जी ने पूरी गति से विकास किया है।’
विजय सिन्हा के बयान के बाद तेजस्वी फिर खड़े हुए और उन्हें बौना कह दिया। तेजस्वी ने कहा, ‘हम आपकी हताशा समझते हैं। एक सांसद आपको लखीसराय में चलने नहीं देता। सम्राट चौधरी इतने बड़े कद के हैं कि आप उनके पीछे बौने की तरह चलते हैं।’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, बिहार को एक साहसी मुख्यमंत्री चाहिए, बेहोश नहीं। आपके बगल में बैठे लोग आपका भला नहीं चाहते। आपके 3-4 लोगों ने भाजपा से हाथ मिला लिया है।’
‘नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री नहीं गए। एक इन्वेस्टर मीट है, उसमें भी मुख्यमंत्री नहीं जाते। उन्हें हाईजैक कर लिया गया है।’
पेपर लीक पर तेजस्वी और उपमुख्यमंत्री आमने-सामने आ गए। तेजस्वी ने कहा कि पेपर लीक में बिहार नंबर वन है, जिस पर सम्राट चौधरी ने आपत्ति जताई। जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई।
एआईएमआईएम विधायक ने कहा- दाढ़ी, टोपी और मस्जिद देखकर आपको लगता है कि हम बांग्लादेशी हैं।
मानसून सत्र के पहले सत्र में सदन में ‘SIR’ के मुद्दे पर चर्चा हुई। एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान सदन में एसआईआर के खिलाफ बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने दस्तावेजों में खामियों को लेकर सवाल उठाए।
अख्तरुल ईमान ने कहा, ‘हमारी दाढ़ी और टोपी देखकर, हमारी मस्जिदों की मीनारों को देखकर आपको लगता है कि ये लोग भारतीय नहीं, बल्कि बांग्लादेशी हैं।’
‘मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जब देश का बंटवारा हो रहा था, तब पाकिस्तान दो हिस्सों में बँट गया था। अगर सीमांचल ने पाला बदल लिया होता, तो भारत भी दो हिस्सों में बँट जाता।’
इस बीच, भाकपा (माले) विधायक महबूब आलम ने कहा, ‘केंद्र सरकार चुनाव आयोग के ज़रिए एसआईआर के ज़रिए गरीबों, पिछड़ों और दलितों को उनके वोट से वंचित करने की साजिश रच रही है।’
‘इस 780 पन्नों के हलफनामे में न तो घुसपैठिए का नाम है और न ही शब्द। ये लोग घुसपैठियों का ज़िक्र करके मुसलमानों को गाली दे रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘कल का सत्र उपमुख्यमंत्री के अभद्र व्यवहार के कारण स्थगित कर दिया गया था।’
तेजस्वी ने सदन में मांगी माफ़ी, कहा- अगर मुझसे कोई गलती हुई हो तो मुझे खेद है
इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सदन में माफ़ी मांगी। उन्होंने कहा, ‘हम सब एक ही उद्देश्य से आते हैं कि बिहार का विकास हो।’
‘यह आखिरी सत्र है, अगर हमने या हमारी पार्टी ने 5 साल में कोई गलती की हो या किसी को ठेस पहुँचाई हो, तो हम माफ़ी माँगना चाहेंगे, लेकिन यह दोनों तरफ से होना चाहिए।’
तेजस्वी ने आगे कहा, ‘चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष चुनाव कराना है और आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जो 700 पन्नों की रिट दायर की है, उसमें भी कहीं ‘विदेशी’ शब्द का ज़िक्र नहीं है। अगर किसी विदेशी का ज़िक्र हुआ है, तो इसकी ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है।’
‘यह सब मुद्दों से भटकाने की कोशिश है। हम बस यही चाहते हैं कि किसी भी बिहारी का नाम सूची से न काटा जाए। कल जेडीयू के सांसदों और विधायकों ने भी यही बात कही है। मैं चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री यह आश्वासन दें कि किसी भी बिहारी का नाम नहीं काटा जाएगा।’
सदन के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन :
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले, विपक्षी दलों के नेताओं ने काले कपड़े पहनकर सदन के मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। महागठबंधन के नेताओं ने बिहार में चुनाव बहिष्कार की बात कही।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, ‘लाखों मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। लाखों नाम हटाए गए हैं। अब अंतिम सूची जारी होना बाकी है।’
‘हमें चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है। ज़रूरत पड़ी तो सभी विपक्षी दल मिलकर चुनाव का बहिष्कार करेंगे।’
वहीं, मंत्री और भाजपा विधायक श्रवण कुमार का कहना है कि विपक्ष हार के डर से चुनाव बहिष्कार की बात कर रहा है।

