Bihar Elections 2025 : बिहार में मोकामा हत्याकांड के बाद, अपराध और अपराधियों को चुनाव में टिकट दिए जाने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पटना से किशनगंज तक, अलग-अलग पार्टियों ने अपराधियों और उनके रिश्तेदारों को खुलकर टिकट बांटे हैं।
इस बीच पिछले दिनों बीजेपी के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह का एक बयान, जिसमें उन्होंने बिहार के लोगों से जाति-पाति से ऊपर उठकर अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट करने की अपील की थी, मोकामा हत्याकांड के बाद और भी ज़्यादा अहम हो गया है।
अपनी अपील में आर.के. सिंह ने कहा, “मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हूं कि आप किसी भी ऐसे व्यक्ति को वोट न दें जिसका क्रिमिनल बैकग्राउंड हो या जो भ्रष्ट हो, भले ही वह आपकी जाति का हो।” उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगर सभी उम्मीदवार भ्रष्ट या क्रिमिनल नेचर के हैं, तो NOTA (इनमें से कोई नहीं) का इस्तेमाल करें, क्योंकि ऐसे लोगों को वोट देने से बेहतर है कि खुद को डुबो लिया जाए।
आर.के. सिंह ने ताकतवर उम्मीदवारों के नाम बताए:
आर.के. सिंह ने NDA और RJD दोनों गठबंधन के कई उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे बिहार की राजनीति में बाहुबल के गहरे असर का पता चलता है।
मोकामा: NDA के अनंत सिंह और RJD के सूरजभान सिंह की पत्नी। सिंह ने अनंत सिंह को 1985 के ज़माने का उपद्रवी बताया, जबकि सूरजभान सिंह को बिहार का ‘नंबर 1 डॉन’ कहा, जिसे उन्होंने गृह सचिव रहते हुए गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।
नवादा: NDA उम्मीदवार राजबल्लभ यादव की पत्नी (रेप जैसे जघन्य अपराधों के लिए POCSO एक्ट के तहत आरोपी)।
रघुनाथपुर: RJD उम्मीदवार शहाबुद्दीन का बेटा ओसामा :
तारापुर (NDA), जगदीशपुर (NDA), और संदेश (NDA और RJD): यहां भी उम्मीदवारों पर हत्या, नरसंहार, रेत माफिया होने और POCSO एक्ट के उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं।
मोकामा हत्याकांड से चिंताएं बढ़ीं:
इंडिया टुडे के सीनियर पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक पुष्यमित्र के अनुसार, “असली मुद्दों से रहित इस चुनाव में, अपराध और गुंडागर्दी सतह के नीचे सुलग रही थी।” उनका मानना है कि मोकामा में हाल की घटना ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है। राजनीतिक पार्टियों का दोहरा रवैया:
पुष्यमित्र ने राजनीतिक पार्टियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपराध के खिलाफ उपदेश तो देते हैं, लेकिन अपराधियों को टिकट देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाते। उन्होंने कहा कि कोई भी अपराधियों से जुड़ने से नहीं कतरा रहा है, इसलिए चुनिंदा विरोध का कोई मतलब नहीं है। पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन पर सवाल उठे:
मोकामा मर्डर केस ने पुलिस, एडमिनिस्ट्रेशन और इलेक्शन कमीशन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि दबंगों के असर वाले इलाकों में हिंसा-मुक्त चुनाव कैसे करवाए जाएं।
लोग सोशल मीडिया पर आरके सिंह का बयान शेयर कर रहे हैं और अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं। हिंसा-मुक्त और निष्पक्ष चुनाव करवाना इलेक्शन कमीशन के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिहार का चुनावी इतिहास पहले भी खून-खराबे वाला रहा है। बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार बिहार के वोटर जाति के बंधन तोड़कर अपने और अपने बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए अपराध और भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार को वोट देंगे?
(input – dainikjagran.com)

