Bihar News : बिहार में 16 अगस्त से शुरू हो रहे राजस्व महाअभियान के मद्देनजर मुखिया और सरपंच को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दिया गया है। इस संबंध में, विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर बताया है कि राजस्व महाअभियान के सफल संचालन हेतु 10 अगस्त को पटना स्थित राजस्व सर्वेक्षण प्रशिक्षण संस्थान में पंचायत प्रतिनिधि संघों के साथ बैठक की गई थी। उस बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों की सलाह के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
बताया गया कि कई मामलों में रैयत या जमाबंदीदार की मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी होती है। उनका मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे में तुरंत प्रमाण पत्र बनवाना आसान नहीं है। ऐसे में राजस्व महाअभियान के दौरान यदि उनके उत्तराधिकारी सादे कागज पर एक स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत कर पंचायत के मुखिया या सरपंच के हस्ताक्षर से प्रमाणित करवा जमा कर सकते हैं। इसके साथ ही मुखिया या सरपंच के हस्ताक्षर से प्रमाणित वंशावली भी स्वीकार किया जाएगा।
इससे पहले, बिहार में एक वर्ष से अधिक अवधि के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का अधिकार फिर से बीडीओ और नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को दिया गया है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा 7 अगस्त को जारी एक निर्देश के अनुसार बीडीओ और नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को कार्यपालक दंडाधिकारी का भी अधिकार दे दिया गया है। पहले यह जिम्मेदारी सिर्फ अनुमंडल पदाधिकारियों को ही दी जाती थी।
बताया गया है कि पिछले एक महीने में राज्य के एसडीएम कार्यालयों में लगभग 10 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन लंबित हो गए हैं। इस संबंध में बीते 9 जुलाई को अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से नई व्यवस्था लागू की गई थी। इसमें एक वर्ष से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र एसडीएम की अनुशंसा पर बनाए जाने थे। 30 दिन से एक वर्ष के बीच के आवेदन प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी की अनुशंसा पर किए जाने थे। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म या मृत्यु के एक माह के भीतर पंचायत सचिव के स्तर पर आवेदन करना होगा। नई व्यवस्था के अनुसार, एक वर्ष के बाद के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन की अनुशंसा ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ और शहरी क्षेत्रों में कार्यपालक पदाधिकारी करेंगे।

