Bihar Election 2025 : तेजस्वी यादव को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने पटना में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह अहम घोषणा की। उन्होंने कहा, “हम लोकप्रिय और युवा नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करते हैं। इसके अलावा, हमने पिछड़े समुदाय से आने वाले मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार बनती है, तो कुछ अन्य पिछड़े वर्ग के नेता उपमुख्यमंत्री बनेंगे। यह महागठबंधन के भीतर लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने का एक प्रयास है।
अशोक गहलोत ने यह बड़ा ऐलान करते हुए एनडीए से एक अहम सवाल भी पूछा। उन्होंने कहा, “हमने अपना नेता तय कर लिया है। अब एनडीए को भी बताना चाहिए कि उनका नेता कौन है।” उन्होंने कहा, “अमित शाह कह रहे हैं कि हमारा संसदीय दल तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा। इसका मतलब है कि अनिश्चितता है।” उन्होंने आगे कहा, “भाजपा भी यही करती है।” महाराष्ट्र में भी उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कही थी। इससे यह संदेश गया कि शिंदे ही मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया।
तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भाजपा को अब यह बताना चाहिए कि उनका मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन है। उन्होंने कहा कि ये लोग नीतीश कुमार के साथ अन्याय कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार की हालत ऐसी है कि पटना में बड़े-बड़े उद्योगपतियों को गोली मार दी जाती है। मुख्यमंत्री आवास के बाहर गोलियां चलती हैं, और कुछ नहीं होता। सचिवालय के बाहर, मेरे घर के बाहर गोलियां चलीं, और किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया। तेजस्वी यादव ने कहा कि इस सरकार के पास कोई विजन नहीं है। हम लगातार अपना विजन बता रहे हैं। उन्होंने कोई घोषणापत्र या एजेंडा भी जारी नहीं किया है।
अशोक गहलोत ने कहा कि पूरे देश में स्थिति गंभीर है। जो भी आलोचना करता है, उसे जेल जाना पड़ता है, चाहे वह पत्रकार हो या कार्यकर्ता। हर कोई बदलाव चाहता है, और हमें इस जनभावना को समझना होगा। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने एक आकलन किया, जिससे पता चला कि जनता बदलाव चाहती है। राहुल गांधी के बिहार दौरे में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आज सत्ता में बैठे लोगों का लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है। वे सिर्फ़ लोकतंत्र का मुखौटा पहनते हैं। पिछले बिहार चुनाव में हमारा प्रदर्शन ज़बरदस्त रहा। फिर, लोकसभा चुनाव में हमने उन्हें 240 पर समेट दिया, जबकि वे 400 का नारा लगा रहे थे।
पिछला चुनाव तो हम जीत ही जाते, लेकिन थोड़े से अंतर से बाजी पलट गई :
पिछले बिहार चुनाव में वे थोड़े से अंतर से जीते थे। उनके पास धन-बल की कोई कमी नहीं है। वे चुनाव में हर हथकंडा अपनाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को खारिज कर दिया, लेकिन उनके जमा किए हुए धन का क्या होगा? उनके पास कई अलग-अलग तरीके हैं। चुनाव जीतने का उनका एक तरीका झूठे आरोप लगाना, झूठे वादे और दावे करना है। प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक, सब धन-बल की राजनीति करते हैं। महाराष्ट्र चुनाव में उन्होंने कैसे जीत हासिल की, यह बताने की ज़रूरत नहीं है। मैं 50 साल से राजनीति में हूँ, लेकिन मैंने ऐसा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा।

